विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा किस आगे कीजै अरदास किस आगे कीजै अरदास विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा बबिहा सगळी धरती जे फिरै उड़ चढ़े आकाश बबिहा सगळी धरती जे फिरै उड़ चढ़े आकाश उड्ड चढ़े आकाश विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा किस आगे कीजै अरदास किस आगे कीजै अरदास विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा सतगुरु मिलिए जल पाइए चूखे भूख पियास सतगुरु मिलिए जल पाइए चूखे भूख पियास चूखे भूख पियास विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा किस आगे कीजै अरदास किस आगे कीजै अरदास विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा जियो पिंड सब तिस का सब किछ तिस कै पास जियो पिंड सब तिस का सब किछ तिस कै पास सब किछ तिस कै पास विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा किस आगे कीजै अरदास किस आगे कीजै अरदास विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा नानक घट घट एको वरतदा शब्द करै प्रगास नानक घट घट एको वरतदा शब्द करै प्रगास शब्द करै प्रगास विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा किस आगे कीजै अरदास किस आगे कीजै अरदास विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा वाहेगुरु वाहेगुरु… वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु… वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु… वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु… वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु… वाहेगुरु वाहेगुरु विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा विण बोलियां सब कीछ जाणदा
दुर्गा अष्टमी के शुभ अवसर पर राजेश्वरी धाम देवी राज रानी वैष्णो मंदिर,जालंधर में बड़ी श्रद्धा पूर्वक अष्टमी का आयोजन किया गया
मां के चरणों में स्वर्ग है मां दुर्गा आप सबकी मनोकामनाएं पूरी करें और आप सब पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें राजेश्वरी धाम देवी राजरानी वैष्णो मंदिर बस्ती शेख रोड,जालंधर में बड़ी श्रद्धा पूर्वक दुर्गा अष्टमी का आयोजन किया गया | इस मौके पर मां भगवती के सुंदर भजनों का गुणगान किया गया मां का गुणगान करने पहुंची पार्टियों में पवन पुजारी एंड पार्टी, पंकज ठाकुर एंड पार्टी द्वारा भजनों का गुणगान किया गया मंदिर प्रबंधक कमेटी के प्रधान श्री कैलाश बब्बर द्वारा आए हुए भजन गायकों को माता की चुनरी देकर सम्मानित किया अष्टमी के दौरान मां देवी राज रानी जी ने भक्तों को दर्शन देकर आशीर्वाद दिया और मंदिर प्रबंधक कमेटी के प्रधान श्री कैलाश बब्बर ने मंदिर में सेवा करने वाले सभी भक्तों को मां की चुनरी और मां का स्वरूप देकर सम्मानित भी किया अष्टमी के दौरान राजेश्वरी धाम वेलफेयर ट्रस्ट के मेंबर विजय दुआ, सुरेंद्र अरोड़ा, रामकिशन नानू, ज्योति बब्बर, अमन बत्रा, जतिन बब्बर, युदराज सिंह, राजीव सहदेव, सतीश बब्बर, नवीन बब्बर, पंकज ठाकुर, पवन नागपाल, मनमोहन अरोड़ा, जतिन मिंटू, टिम्मी अरोड़ा, किशन लाल, पंकज अरोड़ा, विजय बेगोवाल व अन्य मेंबर मौजूद थे दुर्गा अष्टमी के दौरान मंदिर प्रबंधक कमेटी की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया मंदिर प्रबंधक कमेटी के प्रधान श्री कैलाश बब्बर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहां मां भगवती सबकी झोलिया भरे और सभी भक्तों से कहा कि हर महीने की दुर्गा अष्टमी पर आकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करें और भंडारे का आयोजन भी हर महीने किया जाता है
दर्शन देख जीवां गुरु तेरा || Darshan dekh Jiwan guru tera
दर्शन देख जीवां गुरु तेरा – २ पूरण करम होये प्रभु मेरा – २ एह बिनंती सुन प्रभु मेरे – २ देहे नाम कर अपने चेरे – २ अपनी शरण राख प्रभु दाते – २ गुर-प्रसाद किनै बिरले जाते – २ दर्शन देख जीवां गुरु तेरा – २ सुनो बिनो प्रभ मेरे मीता – २ चरण कमल बसे मेरे चीता – २ दर्शन देख जीवां गुरु तेरा – २ नानक एक करे अरदास – २ बिसर नाही पूरण गुण तास – 2 दर्शन देख जीवां गुरु तेरा – २ दर्शन देख जीवां गुरु तेरा – २ पूरण करम होये प्रभु मेरा – २
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी || Story of satyawadi raja harishchandra in hindi
एक बार राजा हरिश्चंद्र के सपने में गेरुआ वस्त्र धारण किए हुए एक साधु आए, जिन्होंने सम्राट से उनका पूरा राज पाठ दक्षिणी में मांगा लिया। राजा इतने दयालु थे, कि वह कभी भी अपने शरण में आए हुए किसी भी साधु को खाली हाथ नहीं लौटने देते थे, इसलिए राजा हरिश्चंद्र ने अपना पूरा राज्य उन साधु के नाम कर दिया। अगले दिन जब सवेरा हुआ तो राजा के दरबार में एक साधु ने दर्शन दिया।महाराजा हरिश्चंद्र को उस साधु ने अपना सपना याद करवाया, जिसमें उन्होंने अपना सारा राजपाट साधु के नाम कर दिया था।जैसे ही हरीश चंद्र जी को अपना सपना स्मरण हुआ, तो बिना किसी देरी के उन्होंने हामी भरी और अपना विशाल राज्य उन साधु के नाम कर दिया। दरअसल साधु के वेश में वह महात्मा और कोई नहीं, बल्कि स्वयं महर्षि विश्वामित्र थे जो राजा हरिश्चंद्र की परीक्षा लेने आए थे। इसके आगे साधु ने राजा से दक्षिणा की मांग की। हरीश चंद्र जी ने अपने सिपाहियों को शाही खजाने में से भेंट लाने के लिए कहा। लेकिन साधु ने उन्हें स्मरण कराया की राजा ने तो पहले ही सब कुछ साधु के नाम कर दिया है, तो वह राजकोष में से खजाना भला उन्हें दक्षिणा के रूप में कैसे दे सकते हैं।राजा हरिश्चंद्र बड़े दुविधा में पड़ चुके थे, उसी बीच साधु ने क्रोध में आकर उनसे कहा, कि यदि आप मुझे दक्षिणा नहीं दे सकते तो आप मेरा अपमान कर रहे हैं। राजा ने साधु को आश्वासन देते हुए कहा, कि हे देवात्मा मैं आपको दक्षिणा जरूर दूंगा, बस मुझे कुछ समय दीजिए।इसके बाद महाराज अपने पत्नी और पुत्र के साथ राज्य को छोड़कर पावन नगरी काशी में चले गए। यहां उन्होंने स्वयं को बेचना चाहा लेकिन कोई भी उन्हें खरीदने को तैयार ही नहीं था। थोड़े परिश्रम के बाद राजा हरिश्चंद्र ने अपनी पत्नी और पुत्र को एक ब्राह्मण दंपत्ति के यहां बेच दिया जहां, रानी तारामती एक सेविका के रूप में काम करने लगी। राजा ने स्वयं को श्मशान में रहने वाले एक चांडाल को बेचा, जो अंतिम संस्कार किया करता था। चांडाल ने महाराजा हरिश्चंद्र को खरीद लिया और एक सेवक बनाकर रख लिया। महाराजा ने कैसे भी स्वयं तथा अपनी पत्नी और पुत्र को नीलाम कर के दक्षिणा इकट्ठा किया, जिससे उन्होंने साधु को दक्षिणा चुकाया। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन एक दिन जब रोहिताश्व वन में भगवान की पूजा के लिए पुष्प इकट्ठा कर रहा था, तो उसे एक सांप ने दंस लिया जिसके बाद वह मूर्छित हो गया। तारामती अपने मूर्छित पुत्र को लेकर चारों ओर मदद की गुहार लगा रही थी, लेकिन तब तक रोहिताश्व की मृत्यु हो चुकी थी। तारामती अपने पुत्र के मृत शरीर का अंतिम संस्कार करने के लिए शमशान पहुंची तो वहां उनकी मुलाकात अपने पति राजा हरिश्चंद्र से हुई। तारामती ने पुत्र की मृत्यु की बात बताई और बताया कि उनके पास शमशान कर चुकाने के लिए कुछ भी नहीं है। लेकिन फिर भी राजा हरिश्चंद्र जी अपने मालिक के प्रति वफादार रहे और बिना श्मशान कर चुकाए अपने खुद के पुत्र का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया।विवश होकर तारामती ने साड़ी का आंचल फाड़कर शमशान कर चुकाने का निश्चय किया। जैसे ही रानी तारामती ने अपना आंचल फाड़ने की चेष्टा की उसी क्षण आकाश से मेघ गर्जना हुई और एक आकाशवाणी हुई।उस आकाशवाणी मे महर्षि विश्वामित्र जी ने महाराजा हरिश्चंद्र को आशीर्वाद दिया और साथ ही उनके पुत्र रोहिताश्व को भी जीवित कर दिया। तथा साथ ही उनका पूरा राज पाठ ज्यों का त्यों वापस लौटा दिया। उसी क्षण श्मशान में ही देवताओं ने राजा हरिश्चंद्र और रानी तारामती पर पुष्प वर्षा किया। राजा हरिश्चंद्र जी का नाम भी पूरे विश्व में बड़े आदर सत्कार के साथ लिया जाता है। राजा हरिश्चंद्र जी के जीवन से प्रेरित होकर कई नाट्य कलाएं और कथाएं की जाती हैं।
जैन धर्म के उदय के कारण || Reasons for the rise of jainism
जैन धर्म हालाँकि प्राचीन धर्मों में से एक माना जाता है पर इस धर्म का उदय महावीर स्वामी के बाद हुआ। इसके अनेक कारण थे। इस दौरान अनेक राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक परिवर्तन हुए। ये सभी परिवर्तन इस धर्म के उदय का कारण बनें। जिनमें से कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं ● छठी सदी ईसा पूर्व में ब्राह्मणों द्वारा अनेक धार्मिक आडम्बर फैलाए जा रहे थे। इस समय के आते-आते ऋग्वेद आदि में वर्णित बातों को तोड़-मरोड़कर अपने फायदे के लिए प्रयोग किया जाने लगा था। ●इस वक्त 16 महाजनपदों का उदय हुआ था। अतः सत्ता संघर्ष में शामिल क्षत्रिय वर्ण भले ही सत्ता के शीर्ष पर स्थित पहुँच गए थे पर अभी भी उनके स्थान को ब्राह्मणों से नीचे देखा जाता था। इस प्रकार सामाजिक रूप से समाज में एक खाईं बनने लगी थी। क्षत्रियों ने भी वर्ण व्यवस्था का विरोध किया। अगर हम महावीर स्वामी को और उनके समकालीन बुद्ध को भी देखें तो वह भी क्षत्रिय ही थे। ● वैश्य वर्ण भी इस वक्त तक काफी व्यापक रूप में स्थापित हो गया था। आर्थिक रूप से अधिक सम्पन्न होने के बावजूद भी वैश्यों का स्थान ब्राह्मण और क्षत्रिय के नीचे तीसरे स्थान पर ही था। साथ ही सम्पत्ति का कुछ हिस्सा ब्राह्मणों द्वारा पूजा-पाठ आदि कर्म-कांडो के नाम पर लिया जाता था। इस तरह इस वर्ग में भी एक तरह का असंतोष ज़रूर व्याप्त था। इस धर्म की प्रवृत्ति ऐसी न होने के कारण इसे वैश्यों द्वारा संरक्षण और बढ़ावा भी दिया गया। ●शूद्र वर्ण की स्थिति वेदों के बदलते नैरेटिव के साथ दिन पर दिन गिरती चली जा रही थी। जहाँ एक ओर ऋग्वेद में सभी वर्णों की महत्ता को बराबर स्वीकार किया था वहीं इस काल तक उनकी स्थिति बदतर हो चली थी। ●एक वर्ग जो कृषकों का था उनमें बलि प्रथा के कारण असंतोष व्याप्त था। गाय आदि की बलि इस वक्त में दी जाती थी। समय के साथ गाय और बैल पवित्रता के साथ-साथ एक व्यवसायिक रूप से फायदेमंद जानवर बने। किसान एक ऐसी व्यवस्था चाहते थे जिसमें पशु-बलि न हो। ● अब अगर हम वैश्विक स्थिति को देखें तो उस वक्त चीन में कन्फ्यूसियस, इरान में ज़रथ्रुष्ट तथा युनान में पाइथागोरस का उदय हुआ था। अतः विश्व के विभिन्न देशों में भी नए विचारों का जागरण हो रहा था। चूंकि भारत प्राचीन काल से ही व्यवसाय आदि के माध्यम से इन देशों से जुड़ा हुआ था अतः इसके प्रभाव से भारत नहीं रहा जिसके फलस्वरूप यहाँ भी रूढ़िवादी परम्पराओं को गिराकर नए आदर्श की स्थापना की कोशिश की गई।
कर किरपा तेरे गुण गावा || Kar Kirpa tere gun gava
कर किरपा तेरे गुण गावा, नानक नाम जपत सुख पावा, तू वड दाता अन्तर्यामी, सब मे हैं रविया पुरण प्रभ स्वामी, कर किरपा तेरे गुण गावा मेरे प्रभ प्रीतम प्राण अधारा, हॅव सूंड़-सूंड़ जीवा नाम तुमारा, कर किरपा तेरे गुण गावा तेरी शरण मेरे सतगुुरु मेरे पूरे, मन निर्मल होये संता दूरे, कर किरपा तेरे गुण गावा चरण कमल हिर्दय उरधारे, तेरे दर्शन कऊ जाई बल्हारे, कर किरपा तेरे गुण गावा कर कृपा तेरे गुण गावा, नानक नाम जपत सुख पावा, कर किरपा तेरे गुण गावा
कोई बोलै राम राम कोई खुदाए || Koi bole ram ram koi khudaye
कोई बोलै राम राम कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि कोई बोलै राम राम कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ..x2 कारण करण, करण करीम किरपा धार, धार रहीम ..x2 कोई बोलै राम राम, कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ, कोई अलाहि ..x4 कोई नावै तीरथ, कोई हज जाए कोई करै पूजा, कोई सिर निवाए ..x2 कोई करै पूजा, कोई सिर निवाए कोई बोलै राम राम, कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ, कोई अलाहि ..x4 कोई पड़ै बेद, कोई कतेब कोई ओढै नील, कोई सुपेद ..x2 कोई ओढै नील, कोई सुपेद कोई बोलै राम राम, कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ, कोई अलाहि ..x4 कोई कहै तुरक, कोई कहै हिंदू कोई बाछै भिस्त, कोई सुरगिंदू ..x2 कोई बाछै भिस्त, कोई सुरगिंदू कोई बोलै राम राम, कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ..x4 कहु नानक जिन, हुकम पछाता प्रभ साहिब का, तिन भेद जाता ..x2 प्रभ साहिब का, तिन भेद जाता कोई बोलै राम राम कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ..x4 कारण करण करीम ॥ किरपा धार रहीम ॥१॥ रहाउ ॥ कोई बोलै राम राम कोई खुदाए ॥ कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ॥१॥
जैन धर्म का इतिहास || History of jainism
जैन धर्म को भारत के प्राचीन धर्मों में से एक माना जाता है। जैन ग्रंथों के अनुसार यह धर्म अनंतकाल से माना जाता रहा है, हालाँकि यह जनमानस में बड़े स्तर पर महावीर स्वामी के बाद फैलता नज़र आता है। जैन शब्द को ‘जिन’ शब्द से निकला हुआ माना जाता है। जिन’ शब्द ‘जि’ धातु से निकला है जिसका अर्थ है जीतना। इस धर्म की परंपरा का निर्वाह तीर्थंकरों के माध्यम से होता हुआ आज के स्वरूप तक पहुँचा है। जैन धर्म में 24 तिर्थंकर हुए। जिसमें से पहले थे ऋषभदेव तथा अंतिम महावीर स्वामी। इस धर्म की प्राचीनता को सिद्ध करते हुए ऋषभदेव को राजा भरत का पिता तक माना जाता है। जैन धर्म अपने साहित्यिक पक्ष का भी धनी रहा है जो इसकी प्राचीनता को पुष्ट करता है। यह धर्म ‘अहिंसा’ के सिद्धांत को बहुत ही सख़्ती से मानता है। इस धर्म के दो प्रमुख सम्प्रदाय हैं – ‘दिगम्बर‘ और ‘श्वेतांबर‘। जैनियों के धार्मिक स्थल को जिनालय कहा जाता है। जैन बिलो के अनुसार वस्तु का स्वाभाव समझा जाता है, इसलिए जब से सृष्टि है तब से धर्म है, और जब तक सृष्टि है, तब तक धर्म रहेगा, अर्थात् जैन धर्म सदा से अस्तित्व में था और सदा रहेगा। इतिहासकारो द्वारा जैन धर्म का मूल भी सिंधु घाटी सभ्यता से जोड़ा जाता है जो हिन्द आर्य प्रवास से पूर्व की देशी आध्यात्मिकता को दर्शाता है। सिन्धु घाटी से मिले जैन शिलालेख भी जैन धर्म के सबसे प्राचीन धर्म होने की पुष्टि करते है।अन्य शोधार्थियों के अनुसार श्रमण परम्परा ऐतिहासिक वैदिक धर्म के हिन्द-आर्य प्रथाओं के साथ समकालीन और पृथक हुआ।जैन ग्रंथो के अनुसार वर्तमान में प्रचलित जैन धर्म भगवान आदिनाथ के समय से प्रचलन में आया। यहीं से जो तीर्थंकर परम्परा प्रारम्भ हुयी वह भगवान महावीर या वर्धमान तक चलती रही जिन्होंने ईसा से ५२७ वर्ष पूर्व निर्वाण प्राप्त किया था। उनके अनुसार यह धर्म बौद्ध धर्म के पीछे उसी के कुछ तत्वों को लेकर और उनमें कुछ ब्राह्मण धर्म की शैली मिलाकर खडा़ किया गया।
बौद्ध धर्म का इतिहास और रोचक जानकारिया || History and interesting facts of Buddhism
भारत में कई धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं. जिसमें बौद्ध धर्म के अनुयायी भी शामिल हैं. बौद्ध धर्म एक प्राचीन भारतीय धर्म (Indian Religion) है और आज के समय में दुनिया के प्रमुख धर्मों में से एक है. यह भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और दर्शन है. बौद्ध धर्म (Buddhism) की स्थापना तथागत भगवान बुद्ध ने करीब 2600 वर्ष पहले की थी. बौद्ध धर्म को मानने वाले ज्यादातर चीन, जापान, कोरिया, थाईलैंड, कंबोडिया, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और भारत जैसे कई देशों में रहते हैं| बौद्ध धर्म के बारे में कुछ महत्वपूर्ण और रोचक जानकारिया – 1. बुद्ध की जन्म-मृत्यु “ईसा पूर्व 536 – ईसा पूर्व 483” मानी जाती है. हाल ही में हुए शोध से पता चला है कि बुद्ध का जन्म प्रचलित जन्म वर्ष से करीब एक सदी पहले हुआ था, “ईसा पूर्व 623 – ईसा पूर्व 543” को बुद्ध का जीवनकाल माना जाता है. 2. गौतम बुद्ध की मृत्यु के बाद बुद्ध के शरीर के अवशेषों को आठ भागों में बांट कर उन पर आठ स्तूपों का निर्माण कराया गया. 3. बुद्ध का असली नाम सिद्धार्थ गौतम था. “बुद्ध” एक सम्मान जनक उपाधि है यह कोई व्यक्तिगत नाम नहीं है. इसका अर्थ है “जागृत व्यक्ति.” 4. बौद्ध धर्म में कोई एक केंद्रीय ग्रंथ नहीं है. बौद्ध धर्म के अनेक ग्रंथ है, जिन्हें कोई भी व्यक्ति अपने संपूर्ण जीवन काल में नहीं पढ़ सकता. बौद्ध ग्रंथों में सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ “त्रिपिटक” को माना जाता है. 5. बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बिनी में वेसाक पूर्णिमा के दिन एक बगीचे में हुआ था. 6.. बौद्ध धर्म में अन्य धार्मिक प्रथाओं की तरह, किसी व्यक्ति को एक निर्माता, ईश्वर या देवताओं में विश्वास करने की आवश्यकता नहीं होती. तीन मौलिक अवधारणाओं में बौद्ध धर्म विश्वास करता है. 1. कुछ भी स्थायी नहीं है. 2. सभी कार्यों के परिणाम होते हैं. 3. इसे बदलना संभव है. 7.आधिकारिक तौर पर दुनिया के छ: देश बौद्ध राष्ट्र हैं. भूटान, कंबोडिया, श्रीलंका, थाईलैंड, लाओस और म्यांमार. वहीं मंगोलिया, काल्मिकिया और चीन दुनिया में वे देश हैं जो आधिकारिक तौर पर बौद्ध राष्ट्र नहीं है लेकिन बौद्ध धर्म को समर्थन करते हैं. और उसका प्रचार प्रसार करते हैं. 8. वैज्ञानिकों ने जब बौद्ध भिक्षुओं के मस्तिष्क का अध्ययन किया, तो पाया कि ध्यान ने भिक्षुओं के मस्तिष्क की तरंगों को इस तरह से बदल दिया जिससे खुशी और लचीलेपन की भावना कई गुना बढ़ गईं. 9. बुद्ध की प्रथम मूर्ति मथुरा कला के अंतर्गत बनी थी. वहीं सर्वाधिक बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण गंधार शैली के अंतर्गत किया गया था. 10. दुनिया का पहला विश्व धर्म होने के साथ ही बौद्ध धर्म पहला प्रचारक धर्म भी था जो अपने मूल स्थान से दूर-दूर तक पूरी दुनिया में फैला था.
जामा मस्जिद का इतिहास || History of Jama masjid
शाहजहां, अकबर के पोते ने 1656 में प्रचलित छद्म-इटालियन शैली को अस्वीकृत कर दिया। विशाल मस्जिद, जिसे मस्जिद-ए-जहांनुमा के रूप में भी जाना जाता है, (जिसका मतलब है दुनिया का दर्शन)। मुगल वास्तुशिल्प कौशल को दर्शाते हुए यह अपनी दो मीनारों और तीन विशाल गुंबदों के साथ मजबूती से यह दिल्ली में लाल किले के सामने खड़ा है। 25,000 लोग यहाँ के आंगन में अच्छी तरह से 76 x 66 मीटर के आयाम में खड़े हो सकते हैं और अपनी नमाज़ अदा कर सकते है|इसे व्यापक हिंदू और मुस्लिम वास्तुकला तकनीक से तैयार किया गया है विभिन्न ऊँचाइयों के लगभग 15 गुंबदों को बनाए रखने के लिये 260 स्तंभों का प्रयोग किया गया है जो मस्जिद की भव्यता को बढ़ाते है। मस्जिद के दरवाजे क्रमशः 35,39,33 पूर्वी, उत्तरी, दक्षिणी ओर है। दक्षिणी छोर में एक मदरसा था, लेकिन 1857 के विद्रोह में इसे नष्ट कर दिया। पूरे मस्जिद 261 फीट x 90 फीट है, इसके आँगन में एक प्रार्थना स्थल है और मस्जिद का फर्श सफेद और काले पत्थरों के वैकल्पिक पट्टियों से बना है। मुस्लिमों के लिये प्रार्थना स्थल को कालीन से सजावट किया है। 2006 के ब्लास्ट से जामा मस्जिद के भीतर मुसलमानों के मन में जबरदस्त डर पैदा कर दिया। यह शुक्रवार का दिन था, यह एक ऐसा दिन जिसमें अल्लाह ने मस्जिद को बचाया लिया और यह दिल्ली शहर के लोगों के दिलों में सुंदर रूप से आज भी खड़ा है।
हाजी अली दरगाह का इतिहास || History of haji ali dargah
शहर के मध्य में स्थित ये पवित्र दरगाह मुंबई की मान्यता प्राप्त सरहद है। सुन्नी समूह के बरेलवी संप्रदाय द्वारा इस मंदिर की देखरेख की जाती है। यहां हर धर्म के लोग आकर अपनी मनोकामना का धागा बांधकर जाते हैं। उन्हें यह उम्मीद होती है कि यहां मांगी गई मुराद जरूर पूरी होती है। यह दरगाह वर्ली की खाड़ी से 500 गज की दूरी पर समुद्र में एक छोटे द्वीप पर स्थित है। यह शहर की सीमा महालक्ष्मी से एक संकरे सेतुमार्ग द्वारा जुड़ा है। इस पुल में कोई रेलिंग नहीं है किंतु ज्वार के आने पर रस्सी बांध दी जाती है। इसलिए दरगाह तक तभी जाया जा सकता है जबकि समुद्र का जलस्तर कम हो। यह 500 गज की यात्रा जिसके दोनों तरफ समुद्र हो यहां की यात्रा की मुख्य आकर्षण है। हाजी अली की दरगाह की स्थापना 1631 ई में की गयी थी । इसका निर्माण हाजी उसमान रनजीकर, जो तीर्थयात्रियों को मक्का ले जाने वाले जहाज के मालिक थे, ने कराया था। समुद्री नमकीन हवाओं के कारण इस इमारत को काफी नुकसान हुआ है। सन 1960 में आखिरी बार दरगाह का सुधार कार्य हुआ था। सुन्नी समुदाय के लोग इस मजार की देख-रेख करते हैं। ऐसा माना जाता है कि हाजी अली शाह बुखारी के निधन के पश्चात उनकी बहन ने उनके अधूरे स्वप्न को पूरा करने का बीड़ा उठा लिया था। वह भी इस्लाम के प्रसार-प्रचार में लीन हो गई थीं। वर्ली की खाड़ी से कुछ दूरी पर उनका मकबरा भी स्थित है। हाजी अली की यह दरगाह 4500 वर्ग मीटर तक फैली हुई है, जिसमें 85 फीट ऊंचा मीनार स्थित है। दरगाह के मुख्य भाग तक पहुंचने से पहले काफी लंबा मार्ग तय करना होता है। दरगाह के भीतर हाजी अली शाह बुखारी का मकबरा लाल और हरे रंग की चादर से ढका रहता है। यह दरगाह करीब 400 साल पुरानी है, जिसकी कई बार मरम्मत की जा चुकी है। मुख्य परिसर में पहुंचने पर आपको रंगीन कांच की नक्काशी से लैस स्तंभ नजर आएंगे, जिन पर अल्लाह के 99 नाम लिखे हुए हैं। इसके अलावा इस दरगाह के चारों ओर चांदी के खंबों का दायरा बना हुआ है, जो बेहद खूबसूरत हैं। अन्य दरगाहों की तरह यहां भी महिलाओं और पुरुषों के प्रार्थना करने के लिए अलग-अलग स्थान हैं। कुल-मिलाकर यह कहा जा सकता है कि हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह मुस्लिम नक्काशी और कलाकारी का एक आकर्षक नमूना है। दरगाह तक पहुंचने के लिए जिस मार्ग को तय करना होता है वह दुकानों से भरा है, जहां आपको दरगाह पर चढ़ाने वाली चादर से लेकर फूल और अन्य सभी समान उपलब्ध हो जाएंगे। प्रत्येक आगंतुक मस्जिद में प्रवेश से पहले अपने जूते निकालते हैं।सप्ताह के प्रत्येक शुक्रवार को हाजी अली की दरगाह पर सूफी संगीत और कव्वाली की महफिल सजती है। आंकड़ों के अनुसार बृहस्पतिवार और शुक्रवार को यहां धर्मों के बंधन से मुक्त करीब 50 हजार से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिनमें देश-विदेश से आए पर्यटक भी शामिल हैं।
खुल जायेंगी किताबे || Khul jaayengi kitabe bhajan lyrics
खुल जायेंगी किताबे जब भी हिसाब होगा इंसाफ का तराजू येशु के हाथ होगा…….. 2 खुल जायेंगी किताबे जो भी तू कर रहा है येशु वो देखता है……. 2 हर पल का तुझको इंसा…… 2 देना हिसाब होगा इंसाफ का तराजू येशु के हाथ होगा खुल जायेंगी किताबे जब भी हिसाब होगा इंसाफ का तराजू येशु के हाथ होगा आजा अभी भी मुड़कर येशु भुला रहा ही……. 2 वरना ये याद करले……. 2 तेरा ही नाश होगा इंसाफ का तराजू येशु के हाथ होगा खुल जायेंगी किताबे जब भी हिसाब होगा इंसाफ का तराजू येशु के हाथ होगा…….. 2 खुल जायेंगी किताबे
अच्चुतम केशवम् || Achchutam keshavam bhajan lyrics
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता हे भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता है भगवान खाते नहीं, बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता है भगवान सोते नहीं, माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता है भगवान नाचते नहीं, गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । नाम जपते चलो काम करते चलो, हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । याद आएगी उनको कभी ना कभी, कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
रहम नज़र साईं भजन || Raham nazar sai bhajan lyrics
ना मांगू दुआ, ना चाहूँ मेहर, ना मांगू दुआ, ना चाहूँ मेहर, बस तेरा करम हो शामों शहर। ना मांगू दुआ, ना चाहूँ मेहर बस तेरा करम हो शामों शहर। राही को दिखाए राह गुजर, बस एक नज़र तेरी एक नज़र। रहम नज़र साई रहम नज़र रहम नज़र साई रहम नज़र रहम नज़र साई रहम नज़र बाँधी तूने सर पर कफनी, बाँधी तूने सर पर कफनी, तन पर पहना है झोला, कोई फ़क़ीर है मस्त ये मौला, या बैरागी भोला। कहाँ से आये जाये किधर, कहाँ से आये जाये किधर, ये तो है अमन की एक लहर। राही को दिखाए राह गुजर, बस एक नज़र तेरी एक नज़र। रहम नज़र साई रहम नज़र रहम नज़र साई रहम नज़र रहम नज़र साई रहम नज़र बन्दे हैं हम सारे उसके, बन्दे हैं हम सारे उसके, सबका मालिक एक, श्रद्धा और सबुरी रखकर काम किये जा नेक। कोई भी राह, कोई भी सफर, कोई भी राह, कोई भी सफर, उस तक पहुंचे हर एक डगर। राही को दिखाए राह गुजर, बस एक नज़र तेरी एक नज़र। रहम नज़र साईं रहम नज़र, रहम नज़र साईं रहम नज़र, रहम नज़र साईं रहम नज़र।
संभाल प्रभु जी के बोल हिंदी में || Lyrics of sambhal prabhu ji
संभाल प्रभु जी जीवन के हर पल में अभी तक हमको संभाला तूने आगे भी अगुवाई कर जैसा मुर्गी बच्चों को पंखो तले छिपाती – 2 वैसे ही तेरी छाया बना है शरणस्थान संभाल… सनातन के यहोवा तू ही हमारा बल है – 2 तेरे वचन से हमारे जीवन में ज्योति आई संभाल … वायदा ये तूने किया छोड़े न कभी मुझे – 2 खींचा है रूप मेरा हथेली पर अपनी, संभाल… संभाल … है यीशु तेरा ये प्यार वर्णन से है ये अपार – 2 हाथों से हाथ मिलाया आसमानी बाप से हमारा संभाल…
जय देने वाले, प्रभु येशु || Jay dene vale prabhu yeshu
जय देने वाले, प्रभु यीशु को कोटि कोटि धन्यवाद जीवन देने वाले प्रभु यीशु को जीवन भर धन्यवाद हल्लेलुयाह, हल्लेलुयाह गायेंगे आत्मा से भर कर गायेंगे -2. यीशु ज़िदा है वो आने वाला है -2. शांति देने वाले प्रभु यीशु को कोटि कोटि धन्यवाद मुक्ति देने वाले प्रभु यीशु को जीवन भर धन्यवाद चंगा करने वाले प्रभु यीशु को कोटि कोटि धन्यवाद आनंद देने वाले प्रभु यीशु को जीवन भर धन्यवाद जीवन देने वाले प्रभु यीशु को कोटि कोटि धन्यवाद तृप्ति देने वाले प्रभु यीशु को जीवन भर धन्यवाद
मुक्ति दिलाये येशु नाम || Mukti dilaye yeshu naam
मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम चरणी में तूने जन्म लिया येशु, चरणी में तूने जन्म लिया येशु क्रूस पे हुआ बलिदान, क्रूस पे हुआ बलिदान मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम क्रूस पर अपना खून बहाया, क्रूस पर अपना खून बहाया सारा चुकाया दाम, सारा चुकाया दाम मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम येशु दया का बहता सागर, येशु दया का बहता सागर येशु है दाता महान, येशु है दाता महान मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम हम सब के पापों को मिटाने, हम सब के पापों को मिटाने येशु हुआ बलिदान, येशु हुआ बलिदान मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम हम पर भी येशु कृपा करना, हम पर भी येशु कृपा करना हम है पापी नादान, हम है पापी नादान मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम मुक्ति दिलाये येशु नाम, शांति दिलाये येशु नाम
खाटू श्याम जी की आरती || Khatu shyam ji ki aarti
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे…॥ रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे । तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे…॥ गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे । खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे…॥ मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे । सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे…॥ झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे । भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे…॥ जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे । सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे…॥ श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे । कहत भक्त-जन, मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे…॥ जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे । निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
संतोषी माता की आरती || Santoshi mata ki aarti
जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता । अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥ सुंदर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हों । हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हों ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥ गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे । मंदर हंसत करूणामयी, त्रिभुवन मन मोहे ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥ स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरे प्यारे । धूप, दीप,नैवैद्य,मधुमेवा, भोग धरें न्यारे ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥ गुड़ अरु चना परमप्रिय, तामें संतोष कियो। संतोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥ शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही । भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥ मंदिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई । विनय करें हम बालक, चरनन सिर नाई ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥ भक्ति भावमय पूजा, अंगीकृत कीजै । जो मन बसे हमारे, इच्छा फल दीजै ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥ दुखी,दरिद्री ,रोगी , संकटमुक्त किए । बहु धनधान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिए ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥ ध्यान धर्यो जिस जन ने, मनवांछित फल पायो । पूजा कथा श्रवण कर, घर आनंद आयो ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥ शरण गहे की लज्जा, राखियो जगदंबे । संकट तू ही निवारे, दयामयी अंबे ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥ संतोषी मां की आरती, जो कोई नर गावे । ॠद्धिसिद्धि सुख संपत्ति, जी भरकर पावे ॥ ॥ ॐ जय संतोषी माता ॥
लक्ष्मी माता की आरती || Laxmi mata ki aarti
ॐ जय लक्ष्मी माता, तुमको निस दिन सेवत, मैया जी को निस दिन सेवत हर विष्णु विधाता || ॐ जय || उमा रमा ब्रम्हाणी, तुम ही जग माता ओ मैया तुम ही जग माता सूर्य चन्द्र माँ ध्यावत, नारद ऋषि गाता || ॐ जय || दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता ओ मैया सुख सम्पति दाता जो कोई तुम को ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता || ॐ जय || तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता ओ मैया तुम ही शुभ दाता कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भव निधि की दाता || ॐ जय || जिस घर तुम रहती तहँ सब सदगुण आता ओ मैया सब सदगुण आता सब सम्ब्नव हो जाता, मन नहीं घबराता || ॐ जय || तुम बिन यज्ञ न होता, वस्त्र न कोई पाता ओ मैया वस्त्र ना पाटा खान पान का वैभव, सब तुम से आता || ॐ जय || शुभ गुण मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता ओ मैया क्षीरोदधि जाता रत्ना चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता || ॐ जय || धुप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो मैया माँ स्वीकार करो ज्ञान प्रकाश करो माँ, मोहा अज्ञान हरो || ॐ जय || महा लक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता ओ मैया जो कोई गाता उर आनंद समाता, पाप उतर जाता || ॐ जय ||