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जैन धर्म के उदय के कारण || Reasons for the rise of jainism

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जैन धर्म हालाँकि प्राचीन धर्मों में से एक माना जाता है पर इस धर्म का उदय महावीर स्वामी के बाद हुआ। इसके अनेक कारण थे। इस दौरान अनेक राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक परिवर्तन हुए। ये सभी परिवर्तन इस धर्म के उदय का कारण बनें। जिनमें से कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं

● छठी सदी ईसा पूर्व में ब्राह्मणों द्वारा अनेक धार्मिक आडम्बर फैलाए जा रहे थे। इस समय के आते-आते ऋग्वेद आदि में वर्णित बातों को तोड़-मरोड़कर अपने फायदे के लिए प्रयोग किया जाने लगा था।
●इस वक्त 16 महाजनपदों का उदय हुआ था। अतः सत्ता संघर्ष में शामिल क्षत्रिय वर्ण भले ही सत्ता के शीर्ष पर स्थित पहुँच गए थे पर अभी भी उनके स्थान को ब्राह्मणों से नीचे देखा जाता था। इस प्रकार सामाजिक रूप से समाज में एक खाईं बनने लगी थी। क्षत्रियों ने भी वर्ण व्यवस्था का विरोध किया। अगर हम महावीर स्वामी को और उनके समकालीन बुद्ध को भी देखें तो वह भी क्षत्रिय ही थे।
● वैश्य वर्ण भी इस वक्त तक काफी व्यापक रूप में स्थापित हो गया था। आर्थिक रूप से अधिक सम्पन्न होने के बावजूद भी वैश्यों का स्थान ब्राह्मण और क्षत्रिय के नीचे तीसरे स्थान पर ही था। साथ ही सम्पत्ति का कुछ हिस्सा ब्राह्मणों द्वारा पूजा-पाठ आदि कर्म-कांडो के नाम पर लिया जाता था। इस तरह इस वर्ग में भी एक तरह का असंतोष ज़रूर व्याप्त था। इस धर्म की प्रवृत्ति ऐसी न होने के कारण इसे वैश्यों द्वारा संरक्षण और बढ़ावा भी दिया गया।
●शूद्र वर्ण की स्थिति वेदों के बदलते नैरेटिव के साथ दिन पर दिन गिरती चली जा रही थी। जहाँ एक ओर ऋग्वेद में सभी वर्णों की महत्ता को बराबर स्वीकार किया था वहीं इस काल तक उनकी स्थिति बदतर हो चली थी।
●एक वर्ग जो कृषकों का था उनमें बलि प्रथा के कारण असंतोष व्याप्त था। गाय आदि की बलि इस वक्त में दी जाती थी। समय के साथ गाय और बैल पवित्रता के साथ-साथ एक व्यवसायिक रूप से फायदेमंद जानवर बने। किसान एक ऐसी व्यवस्था चाहते थे जिसमें पशु-बलि न हो।
● अब अगर हम वैश्विक स्थिति को देखें तो उस वक्त चीन में कन्फ्यूसियस, इरान में ज़रथ्रुष्ट तथा युनान में पाइथागोरस का उदय हुआ था। अतः विश्व के विभिन्न देशों में भी नए विचारों का जागरण हो रहा था। चूंकि भारत प्राचीन काल से ही व्यवसाय आदि के माध्यम से इन देशों से जुड़ा हुआ था अतः इसके प्रभाव से भारत नहीं रहा जिसके फलस्वरूप यहाँ भी रूढ़िवादी परम्पराओं को गिराकर नए आदर्श की स्थापना की कोशिश की गई।

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