आज रविवार है। रविवार का दिन मुख्य रूप से सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। आज भाद्रपद शुक्ल नवमी भी है।
रविवार व्रत और सूर्य देव की कथा
प्राचीन समय में एक वृद्ध महिला रहती थी। वह सूर्य देव की बहुत बड़ी भक्त थी। प्रत्येक रविवार को वह प्रातः स्नान करके अपने घर और आंगन को साफ करती, सूर्य देव की पूजा करती, उन्हें भोग लगाती और उसके बाद ही भोजन करती थी। उसकी श्रद्धा और नियम के कारण उसके घर में सुख-समृद्धि बनी रहती थी।
उसकी पड़ोसन उससे ईर्ष्या करती थी। वृद्ध महिला पूजा के लिए पड़ोसन की गाय का गोबर लाकर आंगन लीपती थी। एक रविवार पड़ोसन ने गाय को घर के अंदर बांध दिया, जिससे वृद्ध महिला को गोबर नहीं मिला। उसने उस दिन भी अपना नियम नहीं छोड़ा और पूजा-भोग किए बिना भोजन नहीं किया।
उसकी सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उसे दर्शन दिए और उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद दिया। मान्यता के अनुसार, सूर्य देव की कृपा से उसके घर में फिर से सुख-समृद्धि आ गई। पड़ोसन को अपनी ईर्ष्या पर पछतावा हुआ।