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लक्ष्मी माता की पूजा कैसे करनी चाहिए?

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लक्ष्मी माता की पूजा कैसे करनी चाहिए माता लक्ष्मी माता की पूजा श्रद्धा, स्वच्छता और सच्चे मन से करनी चाहिए। माना जाता है कि शुक्रवार और दीपावली के दिन उनकी पूजा विशेष फल देती है। पूजा करने की सरल विधि 1. सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। 2. पूजा स्थान को साफ करें और लाल या गुलाबी कपड़ा बिछाएँ। 3. माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। 4. घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएँ। 5. कमल का फूल, खीर, मिठाई और फल अर्पित करें। 6. “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें। 7. लक्ष्मी चालीसा या श्री सूक्त का पाठ करें। 8. अंत में आरती करके परिवार में प्रसाद बाँटें। विशेष बातें घर में साफ-सफाई और शांति बनाए रखें। शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। शुक्रवार को सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनना भी शुभ माना जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों को दान करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। छोटा मंत्र “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” इस मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।

May 22, 2026 / 0 Comments
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चंद्रप्रभु मंदिर का इतिहास – History of chandraprabhu temple

Hindu

भारत के महाराष्ट्र के पुणे में चंद्रप्रभु मंदिर स्थित है, जो जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर चंद्रप्रभु को समर्पित है। पुणे में चंद्रप्रभु मंदिर के निर्माण की सही तारीख व्यापक रूप से प्रलेखित नहीं है। हालाँकि, ऐसा माना जाता है कि इसे कई दशक पहले स्थानीय जैन समुदाय की सेवा के लिए बनाया गया था। चंद्रप्रभु मंदिर जैनियों के लिए एक पवित्र पूजा स्थल माना जाता है, जो चंद्रप्रभु को श्रद्धांजलि देने और आध्यात्मिक सांत्वना पाने के लिए मंदिर में आते हैं। चंद्रप्रभु को जैन धर्म में एक दिव्य व्यक्ति के रूप में सम्मानित किया जाता है, और उनकी मूर्ति मंदिर का केंद्रीय केंद्र है। मंदिर में पारंपरिक जैन वास्तुशिल्प तत्व शामिल हैं, जिनमें जटिल नक्काशी, अलंकृत सजावट और शिखर शामिल हैं। यह संरचना आम तौर पर बेहतरीन शिल्प कौशल और शिल्प कौशल को प्रदर्शित करती है जो जैन कलात्मक परंपराओं को दर्शाती है। पुणे में चंद्रप्रभु मंदिर क्षेत्र और उसके बाहर रहने वाले जैनियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल के रूप में कार्य करता है। भक्त मंदिर में प्रार्थना करने, अनुष्ठान करने और जैन पुजारियों द्वारा आयोजित धार्मिक समारोहों में भाग लेने के लिए आते हैं। मंदिर पुणे की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत में योगदान देता है, जो शहर में जैन धर्म की उपस्थिति का प्रतिनिधित्व करता है। यह जैनियों के लिए भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है, जो आस्था के अनुयायियों के बीच समुदाय और आध्यात्मिक संबंध की भावना को बढ़ावा देता है। पूजा स्थल के रूप में सेवा करने के अलावा, चंद्रप्रभु मंदिर अक्सर सामुदायिक कार्यक्रमों, धार्मिक प्रवचनों और धर्मार्थ गतिविधियों की मेजबानी करता है, जिसका उद्देश्य करुणा, अहिंसा और दूसरों की सेवा के जैन मूल्यों को बढ़ावा देना है। पुणे में चंद्रप्रभु मंदिर जैनियों के दिलों में एक विशेष स्थान रखता है, जो उन्हें प्रार्थना, चिंतन और आध्यात्मिक विकास के लिए एक पवित्र स्थान प्रदान करता है। यह शहर में जैन धर्म की स्थायी विरासत के प्रमाण के रूप में खड़ा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था और भक्ति के प्रतीक के रूप में कार्य करता है।   चंद्रप्रभु मंदिर का इतिहास – History of chandraprabhu temple

February 22, 2024 / 0 Comments
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म्हारे सिर पे है बाबा जी रो हाथ – Mhare sir par hai babaji ro hath

Hindu

म्हारे सिर पर है, बाबा जी रो हाथ, खाटु वाले रो हाथ, कोई तो म्हारो कई करसी ॥ जे कोई म्हारे श्याम धणी ने, साँचे मन से ध्यावे काल कपाल भी साँवरिये के, भगता से घबरावे, जे कोई पकड़यो है, बाबा जी रो हाँथ कोई तो बाको कई करसी, म्हारे सिर पर हैं, बाबा जी रो हाथ, कोई तो म्हारो कई करसी ॥ जो आपे बिस्वास करे वो, खूंटी ताण के सोवे, बठे प्रवेश करे ना कोई, बाल ना बांको होवे, जाके मन में नहीं है विस्वास, बाको तो बाबो कई करसी, म्हारे सिर पर हैं, बाबा जी रो हाथ, कोई तो म्हारो कई करसी ॥ कलयुग को यो देव बड़ो, दुनिया में नाम कमायो, जद जद भीड़ पड़ी भगता पर, दौड्यो दौड्यो आयो, यो तो घट घट की जाणे सारी बात, कोई तो म्हारो कई करसी, म्हारे सिर पर हैं, बाबा जी रो हाथ, कोई तो म्हारो कई करसी ॥ म्हारे सिर पर है, बाबा जी रो हाथ, खाटु वाले रो हाथ, कोई तो म्हारो कई करसी ॥   म्हारे सिर पे है बाबा जी रो हाथ – Mhare sir par hai babaji ro hath

February 21, 2024 / 0 Comments
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इस साल कब किया जाएगा होलिका दहन, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में – When will holika dahan be done this year, know about the date, auspicious time and method of worship

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पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन होली से एक दिन पहले किया जाता है। होली हिंदुओं का लोकप्रिय त्योहार है और इस दिन एक-दूसरे को रंग लगाए जाते हैं। वहीं, धार्मिक परिपाटी पर होलिका दहन का विशेष महत्व है। होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है। माना जाता है कि एक समय में हिरण्यकश्यप नामक राजा रहा करता था जिसका एक पुत्र था प्रह्लाद। हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को पसंद नहीं करता था जबकि प्रह्लाद विष्णु भक्त था। ऐसे में हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद को मार देना चाहता था। हिरण्यकश्यप की एक बहन थी जिसका नाम होलिका था। होलिका को यह वरदान था कि उसे कोई आग जला नहीं सकती है। इसीलिए हिरण्यकश्यप ने होलिका से कहा कि वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए। होलिका ने ऐसा ही किया। लेकिन, भगवान विष्णु की कृपा से होलिका तो जलकर राख हो गई पर प्रह्लाद बच गया। इसी दिन से हर साल होलिका जलाई जाती है। जानिए इस साल होलिका दहन किस समय किया जाएगा और होलिका दहन किस तरह करते हैं। * होलिका दहन की तिथि:  पंचांग के अनुसार, इस साल होलिका दहन 24 मार्च, रविवार की रात किया जाएगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में विधि अनुसार होलिका दहन किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त प्रदोष काल में भी होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन के अगले दिन रंगों वाली होली मनाई जाएगी। इस साल रंगों से 25 मार्च के दिन खेला जाएगा। कहते हैं होली के दिन लोग सभी बैर भुलाकर एकदूसरे को गले लगा लेते हैं। * होलिका दहन की पूजा विधि:  मान्यतानुसार होलिका दहन के दिन सुबह स्नान पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। गली के किनारे या चौक पर होलिका दहन करने के लिए कुछ दिनों पहले से ही लकड़ियां इकट्ठी करके रखी जाती हैं। होलिका दहन के दिन तैयार की गई होलिका की दिशा में मुख करके बैठा जाता है और भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। होलिका दहन की पूजा सामग्री में फल, फूल, नारियल, रोली, गोबर के कंडे, अनाज, कच्चा सूत, चावल, गुलाल, बताशे, हल्दी, और लोटे में जल भरकर रखा जाता है। \’असृक्पाभयसंत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:। अतस्त्वां पूजायिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव\’ मंत्र का जाप करते हुए होलिका की परिक्रमा की जाती है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।)   इस साल कब किया जाएगा होलिका दहन, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में – When will holika dahan be done this year, know about the date, auspicious time and method of worship

February 15, 2024 / 0 Comments
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श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं – Shri banke bihari teri aarti gaun

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श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं, हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं । आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं, श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं । ॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे, प्यारी बंसी मेरो मन मोहे । देख छवि बलिहारी मैं जाऊं । ॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ चरणों से निकली गंगा प्यारी, जिसने सारी दुनिया तारी । मैं उन चरणों के दर्शन पाऊं । ॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ दास अनाथ के नाथ आप हो, दुःख सुख जीवन प्यारे साथ आप हो । हरी चरणों में शीश झुकाऊं । ॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ श्री हरीदास के प्यारे तुम हो । मेरे मोहन जीवन धन हो। देख युगल छवि बलि बलि जाऊं । ॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं, हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं । आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं, श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं ।   श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं – Shri banke bihari teri aarti gaunv

February 15, 2024 / 0 Comments
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जानिए गुप्त नवरात्रि के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कौन से काम नहीं करने चाहिए। Know what things should be kept in mind during gupt navratri and what are the things which should not be done

Hindu

हिंदू धर्म में वैसे तो दो नवरात्रि मुख्य होती हैं एक शारदीय नवरात्रि और एक चैत्र नवरात्रि लेकिन इन सब के बीच में गुप्त नवरात्रि भी पड़ती हैं, जिनका विशेष महत्व होता है और इस दौरान अगर हम कुछ काम करते हैं तो माता रानी का आशीर्वाद हम पर बना रहता है। वहीं, गुप्त नवरात्रि के दौरान कुछ काम करना निषेध भी होता है। इस साल की पहली गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 10 फरवरी से हो चुकी है। ऐसे में आइए हम आपको बताते हैं कि इस दौरान आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और क्या ऐसी चीज हैं जो नहीं करनी चाहिए। * गुप्त नवरात्रि में भूलकर भी ना करें ये काम:  1. अगर आप चाहते हैं कि गुप्त नवरात्रि में आपके घर में माता रानी का आशीर्वाद बना रहे, तो नवरात्रि के दौरान कभी भी बाल नहीं कटवाने चाहिए और नाखून भी नहीं काटने चाहिए। 2. गुप्त नवरात्रि के दौरान घर में प्याज-लहसुन का सेवन करना वर्जित होता है। कहते हैं कि जिस घर में गुप्त नवरात्रि के दौरान प्याज और लहसुन का सेवन होता है, वहां पर राहु और केतु का बुरा साया पड़ता है। मान्यताओं के अनुसार, जिस जगह पर राहु और केतु का खून गिरा था वहीं से लहसुन और प्याज की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इसे नवरात्रि में नहीं खाना चाहिए। 3. जो लोग गुप्त नवरात्रि में 9 दिन का व्रत करते हैं उन्हें दिन के समय नहीं सोना चाहिए। ऐसा कहते हैं कि दिन के समय सोने से व्रत का पूरा फल हमें नहीं मिलता है। आप रात को जल्दी सोकर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठे और नहा धोकर माता रानी की पूजा अर्चना करें। 4. नवरात्रि के दौरान केवल पूजा पाठ करने से ही नहीं बल्कि दूसरों का दिल दुखाने से भी हमें बचाना चाहिए। कहते हैं कि महिलाओं, बुजुर्ग और पशु पक्षियों को इस दौरान बिल्कुल भी परेशान नहीं करना चाहिए। ना ही किसी को मानसिक और शारीरिक रूप से चोट पहुंचाना चाहिए, ऐसा करने से माता रानी रुष्ट हो जाती हैं। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।)   जानिए गुप्त नवरात्रि के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कौन से काम नहीं करने चाहिए। Know what things should be kept in mind during gupt navratri and what are the things which should not be done

February 13, 2024 / 0 Comments
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शिवजी तेरे द्वार हम भी आयेंगे – Shivji tere dwar hum bhi ayenge

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शिवजी तेरे द्वार हम भी आयेंगे गंगाजल से आपको हम नहलायेंगे जनम जनम का प्यासा ये मन तेरे शरण में ही आयेंगे हम हम दीवाने हो गये है आपके हर साँस में तेरे गुण गायेंगे बोलो बोलो बम बम तेरे मिट जाये गम दुःख दूर रहेंगे तुझसे जनम जनम शिवजी तेरे द्वार हम भी आयेंगे गंगाजल से आपको हम नहलायेंगे   शिवजी तेरे द्वार हम भी आयेंगे – Shivji tere dwar hum bhi ayenge

February 12, 2024 / 0 Comments
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गिरिराज जी की आरती – Giriraj ji ki aarti

Hindu

ॐ जय जय जय श्री गिरिराज, जय जय श्री गिरिराज संकट में तुम रखो, निज भक्तन की लाज जय जय जय श्री गिरिराज, जय जय श्री गिरिराज इंद्रादिक सब देवा तुम्हरो ध्यान धरे। ऋषि मुनि जन यश गामें, ते भवसिंधु तरे॥ ॐ जय जय जय श्री गिरिराज सुन्दर रूप तुम्हरौ श्याम सिला सोहें। वन उपवन लखि लखिके ,भक्तन मन मोहें॥ ॐ जय जय जय श्री गिरिराज मध्य मानसी गंगा, कलि के मल हरनी। तापै दीप जलावे, उतरे बैतरनी॥ ॐ जय जय जय श्री गिरिराज नवल अप्सरा कुण्ड सुहाने, दाँये सुखकारी। बायेँ राधा -कृष्ण कुण्ड है, महापाप हारी॥ ॐ जय जय जय श्री गिरिराज तुम हो मुक्ति के दाता, कलयुग में स्वामी। दीनन के हो रक्षक , प्रभु अन्तर्यामी॥ ॐ जय जय जय श्री गिरिराज हम हैं शरण तुम्हरी, गिरवर गिरधारी। देवकीनंदन कृपा करो हे भक्तन हितकारी॥ ॐ जय जय जय श्री गिरिराज जो नर दे परिकम्मा , पूजन पाठ करें। गावें नित्य आरती , पुनि नहीं जनम धरें॥ ॐ जय जय जय श्री गिरिराज   गिरिराज जी की आरती – Giriraj ji ki aarti

February 11, 2024 / 0 Comments
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इस दिन रखा जाएगा जया एकादशी का व्रत और जानिए व्रत कथा के बारे में – Jaya ekadashi fast will be observed on this day and know about the story of the fast

Hindu

हर साल 24 एकादशी पड़ती हैं और हर एकादशी का अपना अलग महत्व होता है। माघ के महीने में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। माना जाता है कि इस एकादशी पर विधि-विधान से भगवान विष्णु का पूजन किया जाए तो घर में सुख-समृद्धि आती है और पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस साल पंचांग के अनुसार, जया एकादशी की तिथि 19 फरवरी की सुबह 8 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी और इस तिथि का समापन 20 फरवरी की सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर हो जाएगा। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए जया एकादशी का व्रत 20 फरवरी को रखा जाएगा और इसी दिन पूजा भी की जाएगी। * जया एकादशी की व्रत कथा:  माना जाता है कि एक समय की बात है जब चिरकाल में स्वर्ग में स्थित नंदन वन में एक उत्सव का आयोजन किया जा रहा था। इस उत्सव में स्वर्ग के सभी देवगण, सिद्धगण और मुनि आदि उपस्थित हुए थे। इस समय नृत्य और गायन चल रहे थे जो गंधर्व और गंधर्व कन्याओं द्वारा किया जा रहा था। इसी समूह में एक नृतिका पुष्यवती की दृष्टि गंधर्व माल्यवान पर पड़ गई और वह उसके यौवन पर मोहित हो गई और अमर्यादित ढंग से नृत्य करने लगी। इस चलते माल्यवान ने बेसुरा गाना गाना शुरू कर दिया। इस घटना को देख-सुन सभी क्रोधित होने लगे। स्वर्ग नरेश इंद्र देव ने क्रोधित होकर दोनों को स्वर्गलोक से निष्कासित कर दिया। इसके साथ ही दोनों को शाप दिया कि दोनों को अधम योनि प्राप्त होगी और दोनों इसके बाद से ही हिमालय में पिशाच योनि में कष्टदारी जीवन व्यतीत करने लगे। सदियों बाद माघ मास की एकादशी अर्थात् जया एकादशी के दिन माल्यवान और पुष्यवती ने कुछ नहीं खाया और फल खाकर दिन व्यतीत किया। इसके बाद रातभर जागरण किया और श्रीहरि का स्मरण किया। इससे भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और दोनों को प्रेत योनि से मुक्त कर दिया। इसके बाद से ही भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने के लिए जया एकादशी का व्रत रखा जाता है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।)   इस दिन रखा जाएगा जया एकादशी का व्रत और जानिए व्रत कथा के बारे में – Jaya ekadashi fast will be observed on this day and know about the story of the fast

February 11, 2024 / 0 Comments
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