धर्म चक्र का इतिहास ॥ History of dharma wheel

धर्मचक्र भारतीय संस्कृति और इतिहास में गहराई से अंतर्निहित है क्योंकि इसका महत्व न केवल बौद्ध धर्म के लिए बल्कि हिंदू धर्म और जैन धर्म सहित भारत के अन्य धर्मों के लिए भी है। हालाँकि, बौद्ध प्रतीक के...

सकारात्मक पर्यावरणीय परिवर्तन लाने में ईसाई धर्म की क्या भूमिका है? What is the role of christianity in bringing positive environmental change?

पर्यावरणविदों की तरह बहुलवादी दृष्टिकोण अपनाने के बजाय, ईसाइयों को सामुदायिक कृषि जैसे पारंपरिक मूल्यों पर जोर देने की जरूरत है। बड़े खेतों के स्वामित्व वाले बड़े पैमाने के खेत अक्सर रासायनिक उर्वरकों...

सतगुरु आया बिणजारा ॥ sataguru aaya binjaara

सतगुरु आवत देखिया ज्यारे काँधे लाल बंदूक, गोली दागी ज्ञान री भाग गया जमदूत सतगुरु आया बिणजारा, रे मनवा, सतगुरु आया बिणजारां रै, अरे आयोड़ो अवसर चूको मति बंदा, मिले ना दूजी बारा रे, सतगुरु आया बिणजारा...

जय जय राधा रमण हरी बोल॥ Jai jai radha raman hari bol

जय जय राधा रमण हरी बोल, जय जय राधा रमण हरि बोल ॥ मन तेरा बोले राधेकृष्णा, तन तेरा बोले राधेकृष्णा, जिव्हा तेरी बोले राधेकृष्णा, मुख से निकले राधेकृष्णा, जय जय राधा रमण हरि बोल, जय जय राधा रमण हरि बोल...

रणकपुर मंदिर का इतिहास || History of ranakpur jain temple

अपनी भव्यता और खूबसूरत नक्काशी के लिए मशहूर इस प्राचीन जैन मंदिर रणकपुरको बनाने की शुरुआत आज से करीब 600 साल पहले 1446 विक्रम संवत में हुई थी, इस मंदिर को बनाने में 50 साल से भी ज्यादा का समय लगा और...

जानिए साल में दो बार क्यों मनाई जाती है ईद? Know why eid is celebrated twice a year

ईद के चांद की मिसाल देते आपने लोगों को कई बार सुना होगा. दरअसल ईद का चांद साल में दो बार ही नजर आता है. एक ईद-उल-फितर (Eid Ul Fitr) जिसे हम मीठी ईद (Meethi Eid) भी कहते हैं और दूसरा ईद-उल-जुहा, जिसे...

महाबोधि मंदिर का इतिहास || History of mahabodhi temple

महाबोधि मंदिर भारत के बिहार राज्य के बोधगया में स्थित एक पवित्र बौद्ध स्थल है। इसका बहुत महत्व है क्योंकि यह वह स्थान माना जाता है जहां बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।...

सर धार ताली गली मेरी आओ || Sir Dhar Tali Gali Meri Aao

जौ तौ प्रेम खेलण का चाओ ॥ सिर धर तली गली मेरी आओ ॥ इत मारग पैर धरीजै ॥ सिर दीजै काण न कीजै ॥ कबीर ऐसी होइ परी मन को भावतु कीनु ॥ मरने ते किआ डरपना जब हाथि सिधउरा लीन ॥ जौ तौ प्रेम खेलण का चाओ.. पहिला...

शनिदेव जी की आरती। Aarti of shani dev ji

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय जय श्री शनि देव…. श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी। नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय जय श्री शनि देव…. क्रीट मुकुट...