सरस्वती माता की आरती || Saraswati mata ki aarti

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता, सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता । जय सरस्वती माता चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी, सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी । जय सरस्वती माता बाएं कर में...

महामृत्युंजय मंत्र अर्थ सहित || Mahamrityunjaya mantra with meaning

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥ महामृत्युंजय मंत्र मृत्यु को जीतने वाला महान मंत्र जिसे त्रयंबकम मंत्र भी कहा जाता है, ऋग्वेद का एक श्लोक...

काल्काजी मंदिर का इतिहास || History of kalkaji temple

काल्काजी मंदिर भारत के प्राचीन और सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भारत के दिल्ली शहर में स्थित हैं। इसे ‘जयंती पीठ’ और ‘मनोकामना सिद्ध पीठ’ के नाम से भी जाना जाता है। मनोकामना का अर्थ...

दुर्गा चालीसा || Durga chalisa in hindi

नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥ शशि ललाट मुख महाविशाला । नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥ रूप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति...

साईं बाबा की आरती || Sai baba ki aarti

आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की। जा की कृपा विपुल सुखकारी, दुःख, शोक, संकट, भयहारी। शिरडी में अवतार रचाया, चमत्कार से तत्त्व दिखाया। कितने भक्त शरण में आए, वे सुख शान्ति निरंतर पाये।...

नवदुर्गा देवी के मंत्र || Navdurga Devi ke Mantra

1️⃣.माता शैलपुत्री- ह्रीं शिवायै नम:। पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता दुर्गा का प्रथम रूप है. इनकी आराधना से कई सिद्धियां प्राप्त होती हैं. प्रतिपदा को मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्ये नम:’ की माला...

छतरपुर मंदिर का इतिहास || History of chhatarpur temple

उस पौराणिक कहानी के अनुसार एक बार एक ऋषि ने दुर्गा देवी की कठोर तपस्या की थी। उस ऋषि का नाम कात्यायन ऋषि था। उस ऋषि की कठोर तपस्या को देखकर दुर्गा देवी प्रसन्न हुई और उस ऋषि के सामने प्रकट हुई। देवी...

अक्षरधाम मंदिर का इतिहास || History of akshardham temple

अक्षरधाम या स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर एक हिन्दू मंदिर है और भारत के नयी दिल्ली में स्थापित साहित्यिक-सांस्कृतिक स्थान है। यह मंदिर दिल्ली अक्षरधाम या स्वामीनारायण अक्षरधाम के नाम से भी जाना जाता है।...

आरती कुंज बिहारी कि || Aarti kunj bihari Ki

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला । श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला । गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली । लतन में ठाढ़े...