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इस्लाम धर्म का इतिहास || History of islam

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इस्लाम एक एकेश्वरवादी धर्म है जो अल्लाह की तरफ़ से अंतिम रसूल और नबी, पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब सल्ल. द्वारा इंसानों तक पहुंचाई गई अंतिम ईश्वरीय किताब (क़ुरआन) की शिक्षा पर स्थापित है। इस्लाम शब्द का अर्थ है – ‘अल्लाह को समर्पण’। इस प्रकार मुसलमान वह है, जिसने अपने आपको अल्लाह को समर्पित कर दिया, अर्थात इस्लाम धर्म के नियमों पर चलने लगा।

इस्लाम धर्म का आधारभूत सिद्धांत अल्लाह को सर्वशक्तिमान, एकमात्र ईश्वर और जगत का पालक तथा हज़रत मुहम्मद (सल्ल) को उनका संदेशवाहक या पैगम्बर मानना है। यही बात उनके ‘कलमे’ में दोहराई जाती है – ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह अर्थात ‘अल्लाह एक है, उसके अलावा कोई दूसरा नहीं और मुहम्मद उसके रसूल या पैगम्बर।’ कोई भी शुभ कार्य करने से पूर्व मुसलमान यह क़लमा पढ़ते हैं।

इस्लाम में अल्लाह को कुछ हद तक साकार माना गया है, जो इस दुनिया से काफ़ी दूर सातवें आसमान पर रहता है। वह अभाव (शून्य) में सिर्फ़ ‘कुन’ कहकर ही दुनिया रचता है। उसकी रचनाओं में आग से बने फ़रिश्ते और मिट्टी से बने मनुष्य सर्वश्रेष्ठ हैं। गुमराह फ़रिश्तों को ‘शैतान’ कहा जाता है। इस्लाम के अनुसार मनुष्य सिर्फ़ एक बार दुनिया में जन्म लेता है। मृत्यु के पश्चात पुनः वह ईश्वरीय निर्णय (क़यामत) के दिन जी उठता है और मनुष्य के रूप में किये गये अपने कर्मों के अनुसार ही ‘जन्नत’ (स्वर्ग) या ‘नरक’ पाता है।

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